खगड़िया समाहरणालय का कर्मी गन हाउस मामले में अरेस्ट: तस्कर को मृत व्यक्ति का लाइसेंस उपलब्ध कराता था, फर्जी तरीके से बेचे थे 90 कारतूस – Purnia News

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पूर्णिया के हाई प्रोफाइल विशाल गन हाउस मामले में पुलिस ने हथियार की खरीद फरोख्त के धंधे में शामिल इन्द्रजीत कुमार के पार्टनर को भी धर दबोचा है। अविनाश खगड़िया समाहरणालय के सामान्य शाखा के आर्म्स सेक्शन का कार्यपालक सहायक निकला। के.हाट थाना और एसटीएफ

कार्यपालक सहायक अविनाश कुमार ही मुर्दे के हथियार का लाइसेंस हथियार तस्कर को उपलब्ध कराया करता था। पुलिस की पूछताछ में अविनाश ने खुद ये बात कुबूल की, जिसके बाद के.हाट थाना की पुलिस ने अविनाश कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

गन हाउस के मालिक इंद्रजीत कुमार अरेस्ट हुए थे

इससे पहले हथियार की खरीद फरोख्त के मामले में पुलिस और एसटीएफ ने विशाल गन हाउस के मालिक इंद्रजीत कुमार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में इन्द्रजीत ने अविनाश कुमार का नाम उगला था। साथ ही ये बताया था कि अविनाश खगड़िया समाहरणालय के सामान्य शाखा के आर्म्स सेक्शन में कार्यपालक सहायक है।

इससे पहले पुलिस ने विशाल गन हाउस के मालिक इंद्रजीत को गिरफ्तार किया था।

इसी के बाद अविनाश की गिरफ्तारी के लिए के.हाट थाना और एसटीएफ की संयुक्त टीम का गठन किया गया। गठित टीम ने खगड़िया के कचहरी पथ से आर्म्स सेक्शन के कार्यपालक सहायक अविनाश कुमार को धर दबोचा और फिर उसे गिरफ्तार कर पूर्णिया के के.हाट थाना लाया गया।

सख्ती से पूछताछ में अविनाश कुमार ने बताया कि वो खगड़िया समाहरणालय के सामान्य शाखा के आर्म्स सेक्शन में कार्यपालक सहायक है। वो और इंद्रजीत अवैध रूप से हथियार तस्करी के धंधे में एक दूसरे से जुड़े रहे।

के.हाट पुलिस और एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शातिर को गिरफ्तार किया है।

के.हाट पुलिस और एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शातिर को गिरफ्तार किया है।

फर्जी तरीके से 90 कारतूस बेचे थे

अविनाश ने आगे बताया कि उसने ही खगड़िया के रहने वाले जगदीश प्रसाद निराला और शेखपुरा के मृत लाइसेंसधारी के लाइसेंस को विशाल गन हाउस के संचालक इंद्रजीत कुमार को उपलब्ध कराया था। विशाल गन हाउस के संचालक इन्द्रजीत कुमार ने खगड़िया के रहने वाले जगदीश प्रसाद निराला के नाम पर फर्जी तरीके से 90 कारतूस बेचे थे।

इसी साल जून में अलग-अलग तारीखों में ये कारतूस बेचे गए थे। जबकि निराला की मौत पिछले साल ही हो चुकी है। इसी लाइसेंस पर वो बिहार के अलग अलग जिलों के आर्म्स दुकान से कारतूस खरीदकर गिरोहों के बीच बेच देता था।



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