जिसने खुलवाया था सबसे पहले राम मंदिर का ताला… अब तक जिंदा, 125 साल उम्र, क्या मिल गया ‘चिरंजीवी’ का वरदान!

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बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने 125 साल के राम लखन दास वैद्य से मुलाकात की, जिन्होंने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का ताला खुलवाने में भूमिका निभाई थी.

जिसने खुलवाया था सबसे पहले राम मंदिर का ताला... अब तक जिंदा, 125 साल उम्रबिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का एक वीडियो तेजी से हो रहा है वायरल

अयोध्या. बिहार के पूर्व डीजीपी और अब कथावाचक गुप्तेश्वर पांडेय ने हाल ही में अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने 125 साल के राम लखन दास वैद्य से अपनी मुलाकात का जिक्र किया. इस मुलाकात को उन्होंने दावा किया है कि राम लखन दास जी वो शख्स हैं, जिन्होंने पहली बार अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का ताला खुलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यह मुलाकात अयोध्या में एक धार्मिक आयोजन के दौरान हुई, जिसने न केवल श्रोताओं को आश्चर्यचकित किया, बल्कि राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास को एक नया दृष्टिकोण भी दिया. अब वही राम लखन दास अयोध्या में दशरथ मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं.

बिहार कैडर के 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय 2020 में बिहार के डीजीपी पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर कथावाचन के क्षेत्र में प्रवेश किया, आजकल अपनी श्रीमद्भागवत और रामचरितमानस की कथाओं के लिए प्रसिद्ध हैं. उन्हें हाल ही में जगतगुरु रामानुजाचार्य की उपाधि भी प्राप्त हुई है. अपने फेसबुक वीडियो में पांडेय ने बताया कि राम लखन दास वैद्य, जो 125 वर्ष की आयु में भी स्वस्थ हैं, ने उन्हें उस ऐतिहासिक घटना के बारे में विस्तार से बताया, जब श्रीराम जन्मभूमि का ताला खोला गया था. जब अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर था.

पांडेय ने वीडियो में वैद्य को एक जीवित इतिहास के रूप में प्रस्तुत किया, जिन्होंने उस समय के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी. वैद्य ने कथित तौर पर बताया कि उनकी सहायता से ताला खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो राम जन्मभूमि आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. पांडेय ने इस मुलाकात को प्रभु श्रीराम की कृपा का परिणाम बताया और कहा, “ऐसे साक्षी से मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. उनकी कहानी हर राम भक्त को प्रेरित करेगी.

इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है. कई लोगों ने इसे आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना, जबकि कुछ ने इसकी सत्यता पर सवाल उठाए. इतिहासकारों का कहना है कि राम लखन दास वैद्य की कहानी की गहन जांच की आवश्यकता है, क्योंकि यह राम जन्मभूमि आंदोलन के अनछुए पहलुओं को उजागर कर सकती है. गुप्तेश्वर पांडेय की यह पहल उनकी आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा मानी जा रही है. बक्सर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले पांडेय ने अपने कठिन परिश्रम से आईपीएस बनने का सफर तय किया और बाद में आध्यात्म की राह चुनी. उनकी यह मुलाकात और फेसबुक वीडियो न केवल उनके अनुयायियों के बीच उत्साह का कारण बना, बल्कि अयोध्या के धार्मिक महत्व को भी रेखांकित करता है.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा… और पढ़ें

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