नालंदा जिले के जेडीयू नेता रिशु कुमार उर्फ रिषी भूषण कुमार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके मामले में पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से दायर स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को खारिज कर दिया है। जो CCA के तहत लगाए गए आरोपों से जुड़ा था।
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इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने नालंदा के तत्कालीन जिलाधिकारी शशांक शुभंकर द्वारा रिशु कुमार पर लगाए गए CCA को निरस्त करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने न केवल CCA को रद्द किया था, बल्कि जिलाधिकारी पर 5,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इस निर्णय के खिलाफ पूर्व जिलाधिकारी शशांक शुभंकर (वर्तमान में गया के जिलाधिकारी) और पूर्व पुलिस अधीक्षक अशोक मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
रिशु कुमार को सुप्रीम कोर्ट से भी मिली जीत।
अशोक मिश्रा के अन्य विवाद
पूर्व पुलिस अधीक्षक अशोक मिश्रा के खिलाफ समस्तीपुर में हुए एक अन्य कारनामे को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की थी और स्पष्टीकरण मांगा था। उन्हें फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया गया है।
लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत
रिशु कुमार ने इस फैसले को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि यह साबित करता है कि “लोकतंत्र में किसी की तानाशाही नहीं चलेगी, चाहे वह किसी भी पद पर बैठा व्यक्ति क्यों न हो।” उन्होंने आगे कहा कि धैर्य और संयम के साथ लड़ी गई यह लंबी न्यायिक लड़ाई अन्याय के विरुद्ध आम जनता के लिए एक मिसाल है।