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सोनबरसा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय परछड्या मुस्लीम टोल में स्थिति और भी गंभीर पाई गई. निरीक्षण के दौरान केवल 40 छात्र उपस्थित मिले, जबकि रिकॉर्ड में औसतन 117 बच्चों को लाभान्वित दर्शाया गया था. प्रधानाध्यापक जयजीत कुमार गुटखा सेवन करते पाए गए, जिससे विद्यालय की कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े हो गए.
सीतामढ़ी: सरकारी स्कूलों में समय-समय पर मिड-डे मील में लापरवाही और भ्रष्टाचार की खबरें आती रहती हैं. कहीं खाना बनाने में लापरवाही होती है तो कहीं बच्चों की संख्या बढ़ाकर भ्रष्टाचार का खेल होता है. बिहार के सीतामढ़ी में भी मध्याह्न भोजन योजना को लेकर एक बड़ा खेल उजागर हुआ है. जिले के बाजपट्टी और सोनबरसा प्रखंड के दो विद्यालयों में औचक निरीक्षण के दौरान छात्र उपस्थिति और खाद्यान्न के आंकड़ों में भारी गड़बड़ी सामने आई. स्थापना-सह-मध्याह्न भोजन के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह की जांच में खुलासा हुआ कि कागजों पर बच्चों की संख्या बढ़ाकर खाद्यान्न उठाव और भुगतान दिखाया जा रहा था. मामले को गंभीर मानते हुए दोनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
बाजपट्टी प्रखंड के माध्यमिक विद्यालय बखरी में 14 फरवरी को हुए निरीक्षण में मात्र 174 छात्र उपस्थित मिले, जबकि ई-शिक्षाकोष में पिछले छह दिनों का औसत 351 दर्ज था. यानी उपस्थिति से लगभग दोगुनी संख्या रिकॉर्ड में दिखाई गई. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि किसी भी कक्षा की उपस्थिति पंजी संधारित नहीं थी. प्रधानाध्यापक कैशली अली और सहायक शिक्षक अनिल कुमार कक्षा संचालन छोड़ बाहर बैठे मिले. पोषाहार पंजी के अनुसार 3462 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध होना चाहिए था लेकिन, भौतिक सत्यापन में करीब 60 बैग ही पाए गए. खाद्यान्न अलग-अलग बैग में रखा गया था, जिससे अनियमितता की आशंका और गहरा गई.
सोनबरसा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय परछड्या मुस्लीम टोल में स्थिति और भी गंभीर पाई गई. निरीक्षण के दौरान केवल 40 छात्र उपस्थित मिले, जबकि रिकॉर्ड में औसतन 117 बच्चों को लाभान्वित दर्शाया गया था. प्रधानाध्यापक जयजीत कुमार गुटखा सेवन करते पाए गए, जिससे विद्यालय की कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े हो गए. विद्यालय में समय-सारिणी नहीं थी और पाठ-टीका भी संधारित नहीं किया जा रहा था. तीन सहायक शिक्षक मो० कोनैज रेजा, गीता कुमारी और राकेश प्रकाश महतो उपस्थिति दर्ज कर अनुपस्थित पाए गए. परिसर और शौचालय में गंदगी भी मिली, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
जांच में यह भी सामने आया कि हाजिरी और खाद्यान्न के आंकड़ों में अंतर के कारण सरकार की योजना को आर्थिक क्षति पहुंच रही है. मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन देकर विद्यालय में उपस्थिति बढ़ाना है, लेकिन इस तरह की गड़बड़ियां योजना की साख पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने दोनों विद्यालयों से छात्र उपस्थिति, पोषाहार वितरण, चखना रजिस्टर और गुणवत्ता प्रमाण पत्र सहित सभी अभिलेख तलब किए हैं. सोनबरसा विद्यालय में निरीक्षण तिथि का वेतन भी स्थगित कर दिया गया है.
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. जिला स्तर पर अब अन्य विद्यालयों में भी औचक निरीक्षण की तैयारी की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के हक से कोई समझौता नहीं होगा. इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि मिड-डे मील योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तय है.
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