मछली पालन से बदली कटिहार के राजेश की किस्मत, कम लागत में कमा रहे बड़ा मुनाफा, जानिए इनकी कहानी

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राजेश प्रसाद सफल मछली पालन करने से पहले मुर्गी पालन का व्यवसाय करते थे. कई वर्षों तक यह काम सफल रहा था. लेकिन अचानक बाजार में उतार-चढ़ाव और बीमारी के कारण मुर्गी पालन में भारी नुकसान हुआ. राजेश के लिए यह वह समय था जब किसी भी आम व्यक्ति का हौसला टूट सकता था.

कटिहारः बिहार के कटिहार जिला के छिट्टाबाड़ी के रहने वाले राजेश प्रसाद आज मछली पालन के क्षेत्र में एक सफल और प्रेरणादायी नाम बन चुके हैं. लेकिन उनकी सफलता के पीछे संघर्ष की कहानी, साथ ही जोखिम और नए रास्ते खोजने की जिद छिपी है. राजेश प्रसाद सफल मछली पालन करने से पहले मुर्गी पालन का व्यवसाय करते थे. कई वर्षों तक यह काम सफल रहा था. लेकिन अचानक बाजार में उतार-चढ़ाव और बीमारी के कारण मुर्गी पालन में भारी नुकसान हुआ. राजेश के लिए यह वह समय था जब किसी भी आम व्यक्ति का हौसला टूट सकता था, लेकिन राजेश ने हार नहीं मानी. राजेश नए रास्तों की तलाश में जुट गए. इसी बीच उसने मछली पालन को चुना. हालांकि इस काम में भी उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. समय के साथ कड़ी मेहनत और जिद ने उन्हें सफल बनाया.

छोटे शुरुआत के बाद 10 लाख की लागत से बड़े स्तर पर मछली पालन
राजेश प्रसाद बताते हैं कि शुरुआत उन्होंने बहुत छोटे स्तर से की. पहले एक छोटे तालाब में प्रयोग के तौर पर मछली पालन शुरू किया. शुरुआती सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने का साहस दिया. इसके बाद उन्होंने छोटे-छोटे टैंकों में मछली पालन करना शुरू किया और लगातार सीखते गए. धीरे-धीरे उनका अनुभव बढ़ा और मछली पालन का काम भी रफ्तार पकड़ने लगा. इस दौरान उन्हें मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला, जिससे तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग से उनका काम और मजबूती के साथ आगे बढ़ सका. आज राजेश प्रसाद लगभग 10 लाख की लागत से बड़े स्तर पर मछली पालन कर रहे हैं.

5 महीने की मेहनत से 80 प्रतिशत का मुनाफा
राजेश के पास छह लाख रुपये की लागत का आधुनिक टैंक है जिसमें वे देशी सिंघी और देशी टेंगरा मछली का उत्पादन कर रहे हैं. इन दोनों मछलियों की कटिहार के साथ-साथ पूर्णिया बाजार में भी भारी डिमांड है. यही कारण है कि उनकी मछलियां पांच महीने में तैयार होकर बाजार में पहुंचती हैं तो उन्हें लगभग 80 प्रतिशत तक मुनाफा मिलता है.

13 साल में मछली पालन में कभी नहीं हुआ नुकसान
राजेश कहते हैं कि पिछले 13 वर्षों में मछली पालन से उन्हें कभी नुकसान नहीं हुआ, बल्कि हर साल मुनाफा बढ़ता ही गया है. इतना ही नहीं, राजेश अब देशी सिंघी मछली का ब्रीडिंग कार्य भी खुद से करते हैं, जिससे उनकी लागत और कम होती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है. राजेश का कहना है कि “मछली पालन अगर सही तकनीक के साथ और मेहनत से किया जाए तो यह एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है. बिहार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में मछली पालन रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है.

राजेश प्रसाद की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो किसी असफलता के बाद रुक जाते हैं. राजेश ने साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो हर नुकसान नए अवसर की शुरुआत बन सकता है. उनकी मेहनत, संघर्ष और सफलता न सिर्फ उनके परिवार की तस्वीर बदल चुकी है, बल्कि गांव और जिले के कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

लेखक के बारे में

अमिता किशोर

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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10 लाख की लागत, 80 प्रतिशत मुनाफा, मछली पालन से बदली कटिहार के राजेश की किस्मत



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