Exam Tips: CTET परीक्षा में गद्यांश नहीं बनेंगे बाधा, एक्सपर्ट से जानें गद्य-पद्य हल करने की ‘स्मार्ट ट्रिक’

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सहरसा के एक्सपर्ट शिक्षक शंभू कुमार यादव ने सीटेट अभ्यर्थियों को गद्यांश हल करने के लिए पहले प्रश्न पढ़ने की सलाह दी है, ताकि समय बचे. उन्होंने बताया कि परीक्षा में रटंत ज्ञान के बजाय शिक्षण कौशल और बाल मनोविज्ञान की व्यावहारिक समझ जरूरी है. बेहतर स्कोर के लिए पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास अनिवार्य है.

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सहरसा: सीटेट (CTET) परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए सही रणनीति और स्मार्ट स्टडी बेहद जरूरी है खासकर भाषा विषय में पूछे जाने वाले गद्यांश आधारित प्रश्न कई उम्मीदवारों के लिए चुनौती बन जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सहरसा के एक्सपर्ट शिक्षक शंभू कुमार यादव ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए हैं जो परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में मददगार साबित हो सकते हैं आपको बता दे की इसी महीने से सीटेट परीक्षा आयोजित की जाएगी.

एक्सपर्ट शंभू कुमार यादव का कहना है कि गद्यांश से जुड़े प्रश्नों को हल करते समय सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि गद्यांश पढ़ने से पहले उसके सभी प्रश्नों को ध्यान से पढ़ लिया जाए ऐसा करने से अभ्यर्थी को यह स्पष्ट हो जाता है कि गद्यांश में किस तरह की जानकारी खोजनी है. इससे अनावश्यक पढ़ने में समय बर्बाद नहीं होता और उत्तर जल्दी व सटीक मिल जाते हैं. प्रश्न पढ़ने के बाद गद्यांश को पूरे ध्यान और एकाग्रता के साथ पढ़ना चाहिए। पढ़ते समय मुख्य शब्दों, विचारों और तथ्यों को मन में या पेंसिल से चिन्हित करना बेहद फायदेमंद रहता है.

इस बातों का रखें ध्यान
शंभू कुमार यादव बताते हैं कि सीटेट परीक्षा में गद्यांश से आमतौर पर मुख्य विचार, शीर्षक, शब्दार्थ, निष्कर्ष, कथन-सत्यता और तथ्य आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए हर पंक्ति को समझना जरूरी है, न कि सिर्फ ऊपर-ऊपर से पढ़ना. एक और महत्वपूर्ण बात पर एक्सपर्ट विशेष जोर देते हैं कि सीटेट परीक्षा केवल विषय ज्ञान की परीक्षा नहीं है बल्कि यह शिक्षण कौशल और बाल मनोविज्ञान को भी परखती है खासकर पेपर-1 और पेपर-2 में सबसे ज्यादा प्रश्न इस बात से जुड़े होते हैं कि बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए, उनकी सीखने की प्रक्रिया क्या होती है और शिक्षक की भूमिका क्या होनी चाहिए.

बाल विकास और शिक्षाशास्त्र से जुड़े प्रश्नों में अक्सर यह पूछा जाता है कि किसी विषय को पढ़ाने की सबसे उपयुक्त विधि कौन-सी होगी, कमजोर छात्रों की मदद कैसे की जाए, या कक्षा में विविधता को कैसे संभाला जाए. ऐसे प्रश्नों में रटंत ज्ञान से ज्यादा व्यावहारिक समझ काम आती है. एक्सपर्ट की सलाह है कि अभ्यर्थी केवल किताबें पढ़ने तक सीमित न रहें. बल्कि यह समझने की कोशिश करें कि एक आदर्श शिक्षक बच्चों को किस तरह सीखने के लिए प्रेरित करता है. पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रश्नों का ट्रेंड क्या है और किन टॉपिक्स से बार-बार सवाल पूछे जाते हैं.

लेखक के बारे में

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.

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CTET में गद्यांश नहीं बनेंगे बाधा, जानें गद्य-पद्य हल करने की ‘स्मार्ट ट्रिक’



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