OMG इतने पेड़! पहाड़ों पर बसा बोर्डिंग नहीं, ये है बिहार का छोटा सा स्कूल…इतनी हरियाली जैसे हो पौधों की पाठशाला

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Gaya School Filled With Greenery: गया के इस स्कूल में कदम रखेंगे तो यकीन नहीं होगा कि ये एक गांव का छोटा सा विद्यालय है. यहां इतने पेड़ हैं, इतनी हरियाली है कि सुंदरता मन मोह लेती है. प्रिंसिपल की पहल से पांच साल में स्कूल का रंग-रूप बदला, जिसमें अब बच्चे भी पूरा सपोर्ट कर रहे हैं. तस्वीरों में देखिए यहां की खूबसूरती.

बिहार के गया जिले में एक ऐसा सरकारी विद्यालय है जिसकी सुंदरता देखकर हर कोई आश्चर्यचकित है. यह विद्यालय देखने में प्राइवेट स्कूल से कहीं अधिक सुंदर है. यह स्कूल बोधगया प्रखंड क्षेत्र के सूर्यपुरा गांव में है. राजकीय मध्य विद्यालय सूर्यपुरा के परिसर में लगे विभिन्न तरह के मंहगे सजावटी पौधे विद्यालय की सुंदरता को और अधिक बढ़ा देते हैं.

गया न्युज

इस विद्यालय में बदलाव 2020 के बाद शुरू हुआ जब यहां प्रधानाचार्य के रूप में बैजनाथ कुमार ने पदभार ग्रहण किया. उससे पहले यह स्कूल देखने में आम विद्यालय की तरह ही था. प्रधानाचार्य ने खुद की कोशिश से स्कूल के तकदीर और तस्वीर 5 साल में बदल कर रख दी. अब स्थिति ऐसी है कि विद्यालय में बच्चे खूब आकर्षित होते हैं और रोजाना स्कूल आते हैं.

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यहां 324 बच्चों का नामांकन है जिसमें रोज 260-280 बच्चे स्कूल पहुंचते हैं. विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि 2020 में जब लॉकडाउन लगा था और बच्चे स्कूल नहीं आते थे तो उन दिनों गांव के लोगों से संपर्क कर फूल पत्तियां लगाने का विचार रखा और गांव वालों की सहमति के बाद स्कूल परिसर में मिट्टी भराई का काम पूरा हुआ. गांव वालों ने अपने सहयोग से स्कूल के अंदर बाउंड्री वॉल बनायी और उसके बाद खुद के पैसे से महंगे फूल और पौधे लगाना शुरू कर दिया.

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गार्डेन में सजावटी पौधे आर्ईकेरिया, साइकस, अशोक, डोरंडा इक्जोरा, ट्रेवलर पाम, इटालियन साइप्रस, नाग चंपा, कामिनी, गुलाब, मोरपंखी, पाम ट्री आदि लगे हुए हैं. फूल पत्तियां लगाने के बाद स्कूल के सुंदरता बढ़ती गई. शुरुआत के दिनों में बच्चे इसे खूब नुकसान पहुंचाते थे लेकिन बच्चों को इसे न तोड़ने और छूने के लिए काफी मोटिवेशनल भाषण दिए गए. अब भी रोज प्रार्थना के समय 15 मिनट बच्चों को मोटिवेशनल भाषण शिक्षकों द्वारा दिया जाता है

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अब यहां के छात्र ही इस गार्डन का मेंटेनेंस का काम देखते हैं. कोई कटिंग करता है तो कोई उसमें रोजाना पानी डालता है. हालांकि इस स्कूल में शिक्षकों की घोर कमी है. 324 बच्चे पर यहां प्रधानाचार्य लगाकर कुल पांच शिक्षक हैं जिनमें एक फिजिकल एजुकेशन के टीचर हैं. शिक्षकों की कमी के वजह से यहां के बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती है. हालांकि उस कमी को पूरा करने के लिए प्रधानाचार्य की पहल से शाम 4:00 बजे के बाद सातवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए निशुल्क स्पोकन इंग्लिश की क्लास करायी जाती है.

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