Health tips : दादी-नानी का काजल बच्चों के लिए खतरनाक? नवजात की आंखों के साथ ये प्रयोग घातक

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Kajal ke nuksan : जो काजल कभी बच्चों को नजर लगने से बचाता था, अब खुद खतरनाक बनता जा रहा है. बच्चों की आंखों में काजल लगाने के बाद जलन, सूजन और संक्रमण की शिकायत बढ़ी है. लोकल 18 ने इस बारे में जौनपुर की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल से बात की. वे बताती हैं कि ज्यादातर काजल शुद्ध नहीं होता. इसमें केमिकल, कार्बन, लेड और दूसरे हानिकारक तत्व मिले होते हैं. इनमें से थोड़ा सा भी रसायन आंखों में पहुंचना घातक है. डॉ. गुंजन बताती हैं कि एक साल से कम उम्र के बच्चों की आंखों में किसी भी प्रकार का काजल न लगाएं.

जौनपुर. एक दौर था जब दादी-नानी बच्चों की आंखों में काजल लगाना शुभ मानती थीं. माना जाता था कि इससे नजर नहीं लगती और आंखें सुंदर होती हैं, लेकिन बदलते दौर में वही काजल अब बच्चों की सेहत के लिए खतरा बनता जा रहा है. जौनपुर में हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बच्चों की आंखों में काजल लगाने के बाद जलन, सूजन और संक्रमण की शिकायत बढ़ी है. लोकल 18 से बात करते हुए जौनपुर की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल बताती हैं कि आजकल बाजार में मिलने वाला अधिकांश काजल शुद्ध नहीं होता. इसमें केमिकल, कार्बन, लेड और दूसरे हानिकारक तत्व मिले होते हैं, जो बच्चों की नाजुक आंखों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. नवजात और छोटे बच्चों की आंखों की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है, ऐसे में थोड़ा सा भी रसायन आंखों में पहुंच जाए तो गंभीर परेशानी हो सकती है.

अगर लगाना ही पड़े

डॉ. गुंजन पटेल के मुताबिक, काजल लगाने से बच्चों में आंखों से पानी आना, लगातार आंख मलना, लालिमा, खुजली और सूजन जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं. कई मामलों में आंखों में इंफेक्शन इतना बढ़ जाता है कि बच्चों को दवा और ड्रॉप्स की जरूरत पड़ती है. लंबे समय तक काजल लगाने से कॉर्निया को नुकसान पहुंचने और नजर कमजोर होने का भी खतरा रहता है. डॉ. गुंजन बताती हैं कि बच्चों, विशेषकर एक साल से कम उम्र के बच्चों की आंखों में किसी भी प्रकार का काजल न लगाएं. अगर किसी वजह से काजल लगाना जरूरी लगे तो बाजारू काजल से पूरी तरह परहेज करें.

परंपरा से ज्यादा ये जरूरी

डॉ. गुंजन के अनुसार, काजल से एलर्जी, बैक्टीरियल इंफेक्शन, आंखों की नसों में सूजन, पलकों पर फोड़े और बार-बार आंखों में पानी आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. बच्चों की आंखों की सुरक्षा के लिए परंपरा से ज्यादा जरूरी वैज्ञानिक सोच है. बच्चों की सेहत के साथ कोई भी प्रयोग खतरनाक साबित हो सकता है. आंखों की सफाई के लिए साफ कपड़े और उबले हुए ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करें. किसी भी तरह की जलन या लालिमा दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

लेखक के बारे में

Priyanshu Gupta

प्रियांशु के पास पत्रकारिता में 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। न्यूज 18 (नेटवर्क 18 ग्रुप) से पहले उन्होंने राजस्थान पत्रिका और अमर उजाला के साथ काम किया था। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की है…और पढ़ें

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