‘एक आदमी का दूसरे को खींचना अमानवीय’, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के माथेरान में हाथ रिक्शा तुर

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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के हिल स्टेशन माथेरान में चल रहे हाथ रिक्शा को तत्काल बंद करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इसे अमानवीय बताते हुए राज्य सरकार से कहा कि वह हाथ रिक्शा चलाने वालों को ई-रिक्शा उपलब्ध करवाने की नीति बनाए. वह गुजरात के केवडिया की तरह ई-रिक्शा व्यवस्था को अपनाने पर विचार करे.

भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने तीन जजों की बेंच की तरफ से आदेश लिखवाते हुए कहा, “कोई भी व्यक्ति दूसरे को अपनी इच्छा से नहीं खींचता है. वह ऐसा इसलिए करता है क्योंकि उसके पास जीवनयापन का कोई और साधन नहीं है, लेकिन इस तरह का चलन मानव गरिमा के विरुद्ध है. इसे जारी रखना सामाजिक और आर्थिक न्याय के संवैधानिक वायदे को नीचा दिखाने वाली बात होगी.”

सुप्रीम कोर्ट ने 1980 के एक ऐतिहासिक फैसले का किया जिक्र

कोर्ट ने अपने आदेश में 1980 के ऐतिहासिक ‘आजाद रिक्शा पुलर्स एसोसिएशन बनाम पंजाब’ फैसले का उल्लेख किया है. उस फैसले में रिक्शा वालों को गरिमापूर्ण जीवन देने के लिए कई निर्देश दिए गए थे. चीफ जस्टिस ने कहा, “आजादी के 78 साल, संविधान के 75 साल और इस ऐतिहासिक फैसले के 45 साल बाद भी हाथ रिक्शा जारी रहना दुर्भाग्यपूर्ण है.”

आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार को लोगों को ई-रिक्शा उपलब्ध करवाने की नीति बनानी ही होगी. वह फंड की कमी का बहाना बनाकर इसे नहीं टाल सकती है. कोर्ट ने यह आदेश पर्यावरण और वन संरक्षण से जुड़े एक मामले में दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में राज्य सरकार को ई-रिक्शा नीति बनाने का दिया था निर्देश

दरअसल, माथेरान के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र होने के चलते वहां पेट्रोल-डीजल वाहन चलाने पर रोक है. ऐसे में वहां पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए हाथ रिक्शा यातायात का साधन है. सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के मद्देनजर वहां कुछ ई-रिक्शा उपलब्ध करवाए गए हैं. इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को 6 महीने में ई-रिक्शा नीति बनाने के लिए कहा था. अब कोर्ट ने हाथ रिक्शा पर तत्काल रोक लगा दी है.

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