ईरान के इजरायल व अमेरिका के साथ युद्ध के बीच एलपीजी की किल्लत ने राज्य सरकार और सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर कई सवाल खड़े कर दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 5 साल में प्रदेश की बॉटलिंग क्षमता महज 25 हजार सिलेंडर (14.2 किलो) बढ़ी, जबकि मांग 50 हजार सिलेंडर से ज्यादा बढ़ गई। इस दौरान एलपीजी स्टोरेज क्षमता भी 1.20 लाख मीट्रिक टन ही बढ़ पाई। यानी 5-6 दिन की जरूरत पूरी करने के लिए ही गैस का स्टॉक हो सकता है। बता दें, राजस्थान में पांच साल में घरेलू एलपीजी कनेक्शन 16 लाख से ज्यादा बढ़कर 1.84 करोड़ पहुंच गए। घरेलू एलपीजी की मांग भी प्रति दिन औसतन 2.5 लाख से बढ़कर 3 लाख सिलेंडर के पार हो गई। जबकि, बॉटलिंग क्षमता दो लाख प्रति दिन से बढ़कर 2.25 लाख ही हो पाई। इसके चलते घरेलू एलपीजी खपत और बॉटलिंग क्षमता के बीच अंतर पांच साल में 50 हजार से बढ़कर 75 हजार सिलेंडर हो गया। वहीं 1.43 लाख कमर्शियल उपभोक्ता भी हैं, जिन्हें हर दिन लगभग डेढ़ लाख सिलेंडर (19 किलो) की जरूरत होती है। उधर, राजस्थान में घरेलू एलपीजी की खपत सालाना करीब 5 किलो से ज्यादा बढ़कर औसतन 85 किलो प्रति वर्ष हो गई है। प्रदेश में 2020-21 में 1.67 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी कनेक्शन थे। इसके बाद से पांच साल में 16.77 लाख नए कनेक्शन जुड़े, यानी इनमें 10.04% की वृद्धि हुई है। हालांकि, नए कनेक्शन के मामले में राजस्थान 9वें स्थान पर रहा। बॉटलिंग क्षमता मांग के हिसाब से नहीं बढ़ना चिंताजनक “देश में प्रति कनेक्शन एलपीजी खपत में लगभग 3.38% कमी आई है, लेकिन राजस्थान में 6.82% बढ़कर 85.05 किलो प्रति वर्ष हो गई है। यह दिखाता है कि नए कनेक्शन बढ़ने के साथ एलपीजी का उपयोग भी बढ़ा है। लेकिन, बॉटलिंग क्षमता में धीमी वृद्धि चिंताजनक है। प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल उपभोक्ता भी पांच साल में बढ़े हैं। इसलिए एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार और सरकारी तेल विपणन कंपनियों को बॉटलिंग प्लांट का विस्तार और आधुनिकीकरण के साथ स्टोरेज क्षमता बढ़ानी चाहिए।” — भास्कर एक्सपर्ट- हेमंत प्रभाकर, महासचिव, कैट राजस्थान
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